वरुथिनी एकादशी

वरुथिनी एकादशी (वैशाख कृष्ण एकादशी) की पौराणिक कथा राजा मान्धाता से जुड़ी है, जिनके पैर एक जंगली भालू ने खा लिए थे। भगवान विष्णु की आज्ञा से उन्होंने वरुथिनी एकादशी का व्रत किया और मथुरा में भगवान वराह की पूजा कर पुन: स्वस्थ हुए। यह व्रत पापों के नाश, सौभाग्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना …

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